Tuesday, 20 October 2015

दिनचर्या की अनियमितता भारी भी पड सकती है

समय तो अपनी गति से चलता रहता है। उसी के अनुसार हम सब को अपने-आप को ढालना पड़ता है। सब कुछ उसके अनुसार रहे तो सब ठीक-ठाक चलता है, पर जैसे ही आपने उसके विपरीत कुछ करने का उपक्रम किया उसकी भृकुटि टेढ़ी हो जाती है। इसीलिए ज्ञानी जनों का कहना है कि हर काम समय पर होना चाहिए। 

लोगों का तो पता नहीं पर मैं अपनी सेवानिवृति के दिन का बेसब्री से इंतजार करती रहती थी। उसके बाद बच्चों के पास जा रहने, कुछ व्यवस्थित करने का काम जो टलता आ रहा था। पर यह बात दिमाग में नहीं आती थी कि समय के साथ-साथ शरीर भी तो पहले जैसा दस-दस घंटे काम करने लायक नहीं रह जाता है। आखिरकार वह दिन आ ही गया और हम दोनों बोरिया-बिस्तर समेट दिल्ली आ गए।        

मुझे दो साल पहले अपने डायबिटीक होने का पता चला था, वह भी अचानक।  उस दिन तो भगवान की दया से ही बचाव हो गया था। पर उसके बाद हर काम समयानुसार करते रहने से कोई तकलीफ नहीं हुई। पर परिवेश बदलते ही सारा कुछ उलट-पलट होना स्वाभाविक था। सामान लाने, संभालने, टिकाने में अपने प्रति हुई थोड़ी सी लापरवाही ने बड़ा झटका दे दिया। पिछले हफ्ते रविवार की सुबह अचानक शुगर की कमी के कारण तबियत ऐसी बिगड़ी कि शर्मा जी और बच्चे सभी घबड़ा गए। मुझे तो खैर होश ही नहीं था इन्हीं लोगों ने बाद में सब बताया कि मैं किसी को पहचान ही नहीं पा रही थी। मेरे भाई-भाभी भी तुरंत आ गए।  भाभी ने मुझे संभाला और फिर नर्सिंग होम में दाखिल करवाया गया।  दो दिन बाद घर आई, चार पांच दिन बाद गाडी पटरी पर आती नज़र आई है। 

डाक्टर की यही हिदायत है कि अब ज़रा भी गफलत न कर, घडी की सुइयों के अनुसार अपने को ढालना है।  हर काम, खासकर भोजन और दवा, अपने समय, पर होना चाहिए। जानते तो सभी हैं पर आज-कल की भाग-दौड़ की जिंदगी में गफलत हो ही जाती है। फिर भी कोशिश यही रहनी चाहिए कि तंदरुस्ती बरकरार रहे क्योंकि वही हजार नियामतों के बराबर होती है। 

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